Uttarakhand News: हाल ही में उत्तराखंड के देहरादून में एक खतरनाक घटनाक्रम देखने को मिला, जहां एक कट्टरपंथी संगठन ‘हिंदू रक्षा दल’ द्वारा कश्मीरी मुस्लिम छात्रों को धमकी दी गई कि वे राज्य छोड़ दें, नहीं तो “उन्हें उनके लायक सबक सिखाया जाएगा”। इस वायरल वीडियो के सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आया है और पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ सोशल मीडिया से 25 भड़काऊ पोस्ट हटा दिए हैं।
धमकी का वीडियो और उस पर प्रतिक्रिया
हिंदू रक्षा दल के नेता ललित शर्मा ने एक वीडियो संदेश में कहा, “पहलगाम की घटना ने हमें बहुत आहत किया है। अगर कल सुबह 10 बजे के बाद हमें कोई भी कश्मीरी मुस्लिम राज्य में दिखा, तो उसे उसका ‘इलाज’ मिलेगा।” उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके संगठन के सभी कार्यकर्ता सड़कों पर उतरेंगे और सरकार की प्रतीक्षा नहीं करेंगे।
इस वीडियो के वायरल होते ही देहरादून के कई कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले कश्मीरी छात्रों के बीच भय और चिंता की लहर दौड़ गई। कई छात्रों ने तुरंत राज्य छोड़ने का फैसला किया।
छात्रों में भय का माहौल
दून पीजी कॉलेज के एक छात्र ने बताया कि कम से कम पांच छात्र हवाई अड्डे के लिए निकल चुके हैं। वहीं, 15 छात्र जो परीक्षा में शामिल होने आए थे, उन्हें दाएं-पट्टी संगठनों से धमकियां मिल रही थीं।
BFIT कॉलेज के एक बीएससी द्वितीय वर्ष के छात्र ने बताया कि धमकी मिलने के बाद उन्होंने और उनके साथियों ने गुरुवार शाम की फ्लाइट बुक कर ली। कॉलेज प्रशासन ने छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और उन्हें लगभग 50 किलोमीटर दूर किसी सुरक्षित स्थान पर भेजने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा, “हमने गुरुवार तड़के 2 बजे ही कैंपस छोड़ दिया और दिल्ली की फ्लाइट ले ली। हमारे प्रोफेसर ने अपनी कार और गार्ड की सुविधा दी।”
पुलिस का बयान और प्रशासनिक कार्रवाई
देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने बताया कि पुलिस कॉलेजों और संस्थानों के डीन और वार्डन के संपर्क में है जहां कश्मीरी छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी को सुरक्षा का आश्वासन दिया गया है और अगर कोई कानून के खिलाफ जाता है, तो उस पर सख्त कार्रवाई होगी।
हालांकि, ललित शर्मा द्वारा जारी धमकी वाले वीडियो पर सीधे कोई टिप्पणी नहीं की गई।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
यह पहली बार नहीं है जब कश्मीरी छात्रों को उत्तर भारत के राज्यों में धमकियों का सामना करना पड़ा हो। फरवरी 2019 में पुलवामा आतंकी हमले के बाद भी उत्तराखंड में कई कश्मीरी छात्रों पर हमले हुए थे। आरोप था कि कुछ दक्षिणपंथी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने कॉलेज परिसरों में घुसने की कोशिश की थी और छात्रों को डराया-धमकाया गया था।
जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन की भूमिका
जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन के प्रवक्ता नासिर खुहामी ने बताया कि उन्हें लगातार छात्रों से धमकी मिलने की जानकारी मिल रही है। उन्होंने राज्यपाल और पुलिस से संपर्क कर स्थिति पर ध्यान देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कई छात्र डर के मारे अपने संस्थानों से सीधे हवाई अड्डे के लिए निकल गए। एसोसिएशन लगातार छात्रों से संपर्क में है ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
छात्रों और शिक्षकों की चिंता
कश्मीर के कुपवाड़ा से ताल्लुक रखने वाले एक छात्र ने बताया कि वे सितंबर तक कश्मीर में ही रहेंगे क्योंकि कुछ ही हफ्तों में उनकी गर्मी की छुट्टियां शुरू हो रही हैं। लेकिन वह BFIT संस्थान में पढ़ने वाले अन्य छात्रों और फैकल्टी के लिए चिंतित हैं।
उन्होंने कहा, “हमारी सुरक्षा की चिंता हमारे प्रोफेसरों को भी है। यही कारण है कि उन्होंने हमें बाहर भेजने की व्यवस्था की। लेकिन बाकी छात्रों के बारे में सोचकर मन भारी हो जाता है।”
राज्य में सामाजिक सौहार्द्र पर प्रश्नचिन्ह
इस घटना ने उत्तराखंड में सामाजिक सौहार्द्र पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। राज्य हमेशा से अपनी शांतिपूर्ण और समावेशी संस्कृति के लिए जाना गया है, लेकिन ऐसे घटनाक्रम उस छवि को धूमिल करने का काम करते हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर प्रशासन समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं करता, तो ऐसे कट्टरपंथी संगठनों को बढ़ावा मिलेगा और देश के भीतर सांप्रदायिक तनाव और गहरा सकता है।
सोशल मीडिया की भूमिका
इस घटना में सोशल मीडिया की भूमिका भी बड़ी रही। भड़काऊ वीडियो और पोस्ट कुछ ही घंटों में वायरल हो गए, जिससे अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस ने इस पर संज्ञान लेते हुए 25 आपत्तिजनक पोस्ट हटाए हैं। लेकिन यह भी एक संकेत है कि डिजिटल माध्यमों का गलत इस्तेमाल किस हद तक समाज को प्रभावित कर सकता है।
क्या कहता है कानून?
कानून के मुताबिक, किसी समुदाय विशेष को धमकाना, डराना या उनके खिलाफ हिंसा भड़काने की कोशिश करना दंडनीय अपराध है। भारतीय दंड संहिता की धारा 153A, 295A और 505 जैसी धाराएं ऐसे मामलों में लागू हो सकती हैं।
अगर पुलिस इस मामले में सख्ती से कार्रवाई नहीं करती, तो इससे गलत संदेश जाएगा कि इस तरह की धमकियां देकर लोग बच सकते हैं।
उत्तराखंड जैसे शांतिप्रिय राज्य में ऐसी घटनाएं न केवल छात्रों की सुरक्षा पर सवाल उठाती हैं, बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे को भी नुकसान पहुंचाती हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह ऐसे मामलों में त्वरित और कड़ी कार्रवाई करे, ताकि कोई भी नागरिक, चाहे वह देश के किसी भी हिस्से से क्यों न हो, अपने को असुरक्षित महसूस न करे।
देश की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है और इसे बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।
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