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उत्तराखंड में मुख्य सचिव के नाम से फर्जी पत्र: सुरक्षा मुहैया कराने की ‘साजिश’, तीन पर मुकदमा दर्ज

उत्तराखंड मुख्य सचिव के नाम से फर्जी पत्र: सुरक्षा मुहैया कराने की 'साजिश', तीन पर मुकदमा दर्ज

देहरादून, 19 दिसंबर 2024: उत्तराखंड में मुख्य सचिव के नाम से जारी एक फर्जी पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। यह पत्र सुरक्षा मुहैया कराने के उद्देश्य से बनाया गया था, जिसे जांच के बाद फर्जी पाया गया। इस मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

फर्जी पत्र का मामला

साइबर क्राइम के उपनिरीक्षक रविंद्र सिंह ने नगर कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया कि सहसपुर निवासी नीरज कश्यप को सुरक्षा देने के लिए मुख्य सचिव के नाम से एक फर्जी पत्र तैयार किया गया। इस पत्र में मुख्य सचिव के हस्ताक्षर और आदेश संख्या को कॉपी-पेस्ट किया गया था।

यह पत्र कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। साइबर पुलिस ने पत्र की जांच की तो इसे फर्जी पाया गया।

आरोपियों की पहचान

इस मामले में तीन लोगों को आरोपी बनाया गया है:

  1. नीरज कश्यप – सहसपुर निवासी, जिनके लिए यह पत्र बनाया गया।
  2. पंडित राज आचार्य उर्फ नगेंद्र – देहरादून निवासी, जिसने यह पत्र नीरज को दिया।
  3. सुधीर मिश्रा – लखनऊ निवासी, जिसने आचार्य को यह पत्र भेजा।

साजिश का खुलासा

पूछताछ में नीरज कश्यप ने बताया कि यह पत्र पंडित आचार्य ने उन्हें भेजा था। आचार्य ने दावा किया कि वह गोरखनाथ मठ से जुड़ा हुआ है और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सलाहकार है। आचार्य ने बताया कि उसे यह पत्र लखनऊ से सुधीर मिश्रा ने भेजा था।

पुलिस का बयान

एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि नीरज कश्यप, नगेंद्र, और सुधीर मिश्रा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि यह फर्जी पत्र पहले से जारी एक आदेश की नकल करके बनाया गया था। मामले की गहन जांच की जा रही है।

फर्जीवाड़े का मकसद

यह साजिश नीरज कश्यप को पुलिस सुरक्षा दिलाने के लिए रची गई थी। हालांकि, इस फर्जीवाड़े के पीछे और कौन-कौन लोग जुड़े हो सकते हैं, इसकी जांच जारी है।

आगे की कार्रवाई

पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस साजिश का कोई और पहलू है या इसमें अन्य लोगों की भी संलिप्तता हो सकती है। एसएसपी ने कहा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला उत्तराखंड में फर्जीवाड़े के बढ़ते मामलों की ओर इशारा करता है और साइबर क्राइम से निपटने की जरूरत को रेखांकित करता है।

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