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30 साल बाद घर लौटा लापता पति: सोशल मीडिया बना मिलन की वजह, अल्मोड़ा में भावुक कर देने वाली कहानी

30 साल बाद घर लौटा लापता पति

अल्मोड़ा। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले से एक बेहद भावुक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां 30 साल पहले लापता हुआ एक व्यक्ति अचानक अपने घर लौट आया। इस घटना ने न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे गांव को भावुक कर दिया है। यह कहानी इंतजार, विश्वास और सोशल मीडिया की ताकत की अनोखी मिसाल बन गई है।

जानकारी के अनुसार, स्याल्दे ब्लॉक के एक गांव निवासी महिपाल रजवार वर्ष 1995 में घर से लापता हो गए थे। उस समय उनकी उम्र करीब 24 साल थी और उनकी बेटी महज कुछ महीने की थी। अचानक उनके गायब हो जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

पति के लापता होने के बाद उनकी पत्नी मीना रजवार ने हार नहीं मानी। उन्होंने 30 साल तक अपने पति के लौटने की उम्मीद जिंदा रखी। इस दौरान उन्होंने अपनी बेटी को अकेले पाला, उसे पढ़ाया-लिखाया और शादी तक कराई, लेकिन खुद पति के इंतजार में डटी रहीं।

बताया जा रहा है कि हाल ही में गांव की एक महिला द्वारा घर पर फिल्माया गया एक कुमाऊंनी गीत सोशल मीडिया पर डाला गया। यह वीडियो दूर महाराष्ट्र तक पहुंचा, जहां महिपाल रजवार ने इसे देखा। वीडियो में अपने घर और गांव की झलक देखकर उन्हें अपने परिवार की याद आई और उन्होंने संपर्क किया।

इसके बाद बातचीत और पुष्टि की प्रक्रिया चली और आखिरकार 27 मार्च 2026 को महिपाल ने अपने घर लौटने का फैसला किया। 30 मार्च को जब वे अपने पैतृक गांव पहुंचे तो माहौल बेहद भावुक हो गया। परिवार के लोग खुशी से रो पड़े, वहीं गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।

महिपाल के बारे में यह भी सामने आया है कि वह इन वर्षों में गुजरात और नासिक क्षेत्र में एक साधु के रूप में जीवन बिता रहे थे। हालांकि, इतने लंबे समय तक घर से दूर रहने के पीछे की वजह अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है।

इस बीच, उनकी बुजुर्ग मां, जिनकी उम्र करीब 100 साल बताई जा रही है, बेटे के लौटने का इंतजार कर रही थीं। बेटे की वापसी उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं रही।

यह कहानी अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। लोग मीना रजवार के धैर्य और विश्वास की सराहना कर रहे हैं, वहीं कई लोग यह सवाल भी उठा रहे हैं कि आखिर महिपाल इतने वर्षों तक घर क्यों नहीं लौटे।

फिलहाल, तमाम सवालों के बीच यह घटना एक बात जरूर साबित करती है कि सच्चा इंतजार और अटूट विश्वास कभी व्यर्थ नहीं जाता।

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