Rudraprayag News: उत्तराखंड में मानसून सक्रिय होने के साथ ही रुद्रप्रयाग जिले में राहत एवं बचाव तंत्र पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा और बाद के वर्षों में हुई अतिवृष्टि व भूस्खलन की घटनाओं से सबक लेते हुए प्रशासन ने आपदा प्रबंधन की व्यवस्थाओं को लगातार मजबूत किया है। वर्तमान में जिले में 36 हेलीपैड, केदारनाथ धाम तक एसओएस (SOS) आपात संचार नेटवर्क और 12 एंबुलेंस किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रखी गई हैं।
मानसून के दौरान विशेष रूप से केदारनाथ यात्रा मार्ग और पूर्व में आपदा प्रभावित रहे संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी बढ़ा दी गई है। सड़क बाधित होने की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने के लिए जिलेभर में विकसित हेलीपैड नेटवर्क और एसओएस संचार व्यवस्था को सक्रिय रखा गया है। वहीं आपदा के समय संचार व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए केंद्र सरकार की ब्रॉडबैंड पब्लिक प्रोटेक्शन एंड डिजास्टर रिलीफ (Broadband PPDR) पायलट परियोजना की फील्ड टेस्टिंग भी जिले में की जा रही है।
जिले में 36 हेलीपैड, आपदा में बनते हैं जीवन रेखा
जनपद में कुल 36 हेलीपैड चिन्हित किए गए हैं। इनमें रुद्रप्रयाग तहसील में 5, जखोली में 3 और ऊखीमठ तहसील में 28 हेलीपैड शामिल हैं। प्रमुख हेलीपैड गुलाबराय, अगस्त्यमुनि, फाटा, सेरसी, जामू, मध्यमहेश्वर, कालीमठ, रांसी, गौंडार, ऊखीमठ और चंद्रापुरी में स्थित हैं। सड़क संपर्क बाधित होने की स्थिति में इन्हीं हेलीपैड के माध्यम से राहत सामग्री, मेडिकल सहायता और रेस्क्यू अभियान संचालित किए जाते हैं।
मुख्यालय से केदारनाथ धाम तक सक्रिय है SOS नेटवर्क
एसओएस नेटवर्क आपातकालीन संचार व्यवस्था है, जिसके माध्यम से दुर्घटना, भूस्खलन, खराब मौसम या किसी यात्री के फंसने की स्थिति में तुरंत जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र तक सूचना पहुंचती है। इसके बाद राहत एवं बचाव टीमों को तत्काल मौके पर रवाना किया जाता है।
यह सुविधा रुद्रप्रयाग-जवाड़ी बाईपास, सतेराखाल, बसुकेदार, ऊखीमठ, गुप्तकाशी, फाटा और सोनप्रयाग तक उपलब्ध है। वहीं केदारनाथ पैदल यात्रा मार्ग पर गौरीकुंड, जंगलचट्टी, भीमबली, लिनचोली, रुद्रा प्वाइंट और केदारनाथ में भी एसओएस प्वाइंट स्थापित किए गए हैं।
12 एंबुलेंस हैं तैनात
मानसून और चारधाम यात्रा को देखते हुए जनपद में 12 एंबुलेंस जिला मुख्यालय, विभिन्न तहसील क्षेत्रों और केदारनाथ यात्रा मार्ग पर तैनात की गई हैं। किसी भी आपात स्थिति में मरीजों और यात्रियों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए इन्हें रणनीतिक स्थानों पर रखा गया है।
आधुनिक संचार प्रणाली का भी हो रहा परीक्षण
आपदा के दौरान संचार व्यवस्था बाधित न हो, इसके लिए केंद्र सरकार की ब्रॉडबैंड पब्लिक प्रोटेक्शन एंड डिजास्टर रिलीफ (Broadband PPDR) पायलट परियोजना की फील्ड टेस्टिंग भी रुद्रप्रयाग जिले में की जा रही है। इससे आपदा के समय विभिन्न एजेंसियों के बीच तेज और सुरक्षित संचार सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
क्या कहते हैं अधिकारी?
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि मानसून को देखते हुए सभी विभाग अलर्ट मोड पर हैं। संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राहत एवं बचाव से जुड़े सभी संसाधन पूरी तरह तैयार हैं।
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