
अरकु की वादियों से दुनिया के प्यालों तक
आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीतारामराजू जिले के 11 मंडलों में गुणवत्तापूर्ण कॉफी उत्पादन को बढ़ावा देने और आदिवासी किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से भारत सरकार के Coffee Board of India की पहलों को नई रफ्तार मिली है। अरकु कॉफी को वैश्विक पहचान दिलाने और किसानों तक सीधा लाभ पहुंचाने के लिए बहुस्तरीय रणनीति पर काम किया जा रहा है।
इसी क्रम में प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) ने उत्तराखंड के पत्रकारों के लिए विशेष मीडिया भ्रमण का आयोजन किया। प्रतिनिधियों को अरकु क्षेत्र के डुम्ब्रिगुड़ा मंडल स्थित मुसिरी गांव में संचालित कॉफी नर्सरी का दौरा कराया गया। यहां कॉफी पौध तैयार करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया, आधुनिक नर्सरी प्रबंधन तकनीकों और गुणवत्ता मानकों की जानकारी दी गई।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत Coffee Board of India क्षेत्र में सतत और जैविक कॉफी खेती को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। बोर्ड के वरिष्ठ संपर्क अधिकारी सामला रमेश ने बताया कि आधुनिक कृषि तकनीक, उन्नत रोपण सामग्री, जैविक पद्धतियों और बेहतर प्रसंस्करण ढांचे पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। किसानों को नियमित प्रशिक्षण, तकनीकी परामर्श और वैज्ञानिक तरीकों से उत्पादन बढ़ाने का मार्गदर्शन दिया जा रहा है। इस अवसर पर कनिष्ठ संपर्क अधिकारी वी.वी.के.एम. लक्ष्मी भी उपस्थित रहीं।
केंद्र सरकार कॉफी उत्पादकों को तकनीकी मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता, बाजार संपर्क और ब्रांडिंग समर्थन प्रदान कर रही है। “अरकु वैली कॉफी” के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में समर्पित विपणन रणनीति तैयार की गई है, जिससे निर्यात को बढ़ावा मिल सके।
स्थानीय आदिवासी किसानों ने इस पहल का स्वागत करते हुए विश्वास जताया कि इससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और उनके उत्पाद को उचित पहचान मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, निरंतर नीतिगत समर्थन और वैज्ञानिक हस्तक्षेप के साथ अरकु कॉफी आने वाले समय में देश का एक प्रमुख प्रीमियम ब्रांड बन सकती है।
कॉफी बोर्ड ने संकेत दिए हैं कि आगामी वर्षों में अल्लूरी सीतारामराजू जिले में उत्पादन विस्तार और निर्यात संवर्धन के लिए नए प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।