पौड़ी गढ़वाल। पर्वतीय क्षेत्रों में फसल रोगों के सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल प्रबंधन के लिए वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के पर्वतीय कृषि महाविद्यालय, रानीचौरी परिसर का पादप रोग विज्ञान विभाग किसानों को जैव-नियंत्रण आधारित समाधान उपलब्ध करा रहा है। विभाग की बायोकंट्रोल प्रयोगशाला में तैयार बायोएजेंट फॉर्मूलेशन किसानों की मांग के अनुसार उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
विभागाध्यक्ष डॉ. लक्ष्मी रावत के निर्देशन में प्रयोगशाला में मुख्य रूप से ट्राइकोडर्मा, स्यूडोमोनास और बैसीलस के टैल्क बेस्ड एवं ऑयल बेस्ड बायोफॉर्मूलेशन तैयार किए जा रहे हैं। विभाग के अनुसार ये लाभकारी सूक्ष्मजीव फसल रोगों के कारक रोगजनकों को नियंत्रित करने के साथ पौधों की प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता को सक्रिय करने में भी मदद करते हैं।

उत्तरकाशी, टिहरी गढ़वाल, चमोली और पौड़ी गढ़वाल समेत उत्तराखंड के विभिन्न पर्वतीय क्षेत्रों के किसान अब तक इन बायोएजेंट का उपयोग कर लाभ उठा चुके हैं। किसानों को उनकी फसल और रोग की समस्या के अनुसार उपयुक्त बायोएजेंट के चयन तथा उसके वैज्ञानिक उपयोग की जानकारी भी दी जा रही है।

विभाग का उद्देश्य ‘लैबोरेटरी टू लैंड’ की अवधारणा के तहत वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीक को सीधे किसानों तक पहुंचाना है। विभाग के अनुसार जैव-नियंत्रण तकनीक के उपयोग से रासायनिक कृषि निविष्टियों पर निर्भरता कम करने के साथ मृदा स्वास्थ्य और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।
