
गणेश मन्त्र (Ganesh Mantra)
गणेश मन्त्र (Ganesh Mantra): गणेश मंत्र भारतीय सनातन परंपरा का वह पावन सूत्र है, जो जीवन के हर आरंभ को शुभता और सफलता से जोड़ता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा गया है, इसलिए किसी भी कार्य से पहले उनका स्मरण और मंत्र जाप किया जाता है। गणेश मंत्र न केवल बाधाओं को दूर करता है, बल्कि बुद्धि, विवेक और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता है। जब मन अशांत हो, निर्णय कठिन लगें या रास्ते में रुकावटें आएं, तब यह मंत्र साधक को आंतरिक शक्ति देता है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया गणेश मंत्र का जाप जीवन में स्थिरता, शांति और प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है।
भगवान गणेश के मन्त्र (Ganesh Mantra)
1. वक्रतुण्ड गणेश मन्त्र
श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा॥
2. गणेश शुभ-लाभ मन्त्र
ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये।
वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नमः॥
3. गणेश गायत्री मन्त्र
ॐ एकदन्ताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि,
तन्नो दन्ति प्रचोदयात्॥
4. श्री महागणपति मूल मन्त्र
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये
वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा॥
5. ऋणहर्ता गणपति मन्त्र
ॐ गणेश ऋणं छिन्धि वरेण्यं हुं नमः फट्॥
6. हरिद्रा गणपति मन्त्र
ॐ हुं गं ग्लौं हरिद्रा गणपतये वर वरद
सर्व जन हृदयं स्तम्भय-स्तम्भय स्वाहा॥
7. हेरम्ब गणपति मन्त्र
ॐ नमो हेरम्ब मदमोहित
मम सङ्कटान् निवारय निवारय स्वाहा॥
8. गणेश एकाक्षरी मन्त्र
गं॥
9. गणेश षडाक्षर मन्त्र
ॐ वक्रतुण्डाय हुम्॥
10. गणेश अष्टाक्षर मन्त्र
ॐ गं गणपतये नमः॥
11. क्षिप्र प्रसाद गणपति मन्त्र
गं क्षिप्रप्रसादनाय नमः॥
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