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एसएसबी गुरिल्ला संगठन की चंपावत में आपातकालीन बैठक, सीएम कैंप कार्यालय से मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

एसएसबी गुरिल्ला संगठन

चंपावत: एसएसबी प्रशिक्षित गुरिल्ला संगठन ने मणिपुर की तर्ज पर नौकरी और पेंशन की मांग को लेकर उत्तराखंड सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आज चंपावत में बलवंत सिंह के नेतृत्व में एक आपातकालीन बैठक आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में गुरिल्ला संगठन के पदाधिकारी और सदस्य शामिल हुए। बैठक के बाद सीएम कैंप कार्यालय के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया, जिसमें 15 दिसंबर तक मांग पूरी करने का अल्टीमेटम दिया गया है।

सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप

संगठन ने आरोप लगाया कि सरकार ने 2 सितंबर को मुख्यमंत्री आवास कूच के दौरान गृह सचिव रिद्धिमा अग्रवाल के माध्यम से 48 घंटे में कार्रवाई का वादा किया था। लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। गुरिल्ला संगठन ने इसे सरकार की वादाखिलाफी करार देते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की है। गुरिल्ला संगठन ने सरकार से मांग की है कि उनकी नौकरी और पेंशन की मांग को प्राथमिकता पर हल किया जाए, अन्यथा आंदोलन के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

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आंदोलन का बिगुल: 18 दिसंबर से सीएम आवास पर अनिश्चितकालीन धरना

संगठन के नेता बलवंत सिंह ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिसंबर तक उनकी तीन सूत्रीय मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो 18 दिसंबर से पूरे उत्तराखंड के गुरिल्ला देहरादून में मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि इसके बावजूद सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती, तो सीएम आवास के बाहर आत्मदाह किया जाएगा।

मांगें:

  1. मणिपुर की तर्ज पर एसएसबी गुरिल्लाओं को नौकरी और पेंशन दी जाए।
  2. लंबित फाइलों पर तत्काल निर्णय लिया जाए।
  3. सरकार अपने 48 घंटे के आश्वासन पर कार्रवाई करे।

चंपावत में हुई बैठक में बड़ी संख्या में गुरिल्ला मौजूद थे, जिनमें जिला अध्यक्ष ललित बगोली, धन सिंह, हेम भट्ट, राजेंद्र सिंह कुलाल, चंद्रशेखर पाईनी, ममता जोशी, माया अधिकारी, कुंदन सिंह और योगेंद्र चंद्र समेत कई प्रमुख सदस्य शामिल थे।

बलवंत सिंह ने कहा कि अगर सरकार ने उनकी मांगों को हल्के में लिया, तो यह आंदोलन व्यापक और उग्र होगा। गुरिल्ला संगठन का कहना है कि सरकार की उदासीनता उनके धैर्य की परीक्षा ले रही है। संगठन ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

 


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