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चमोली नंदानगर में बादल फटा: 12 लोग मलबे में दबे, कई घर तबाह, युद्धस्तर पर राहत-बचाव कार्य

चमोली नंदानगर में बादल फटा: 12 लोग मलबे में दबे, कई घर तबाह, युद्धस्तर पर राहत-बचाव कार्य

चमोली। जिले के नंदानगर क्षेत्र में बुधवार देर रात बादल फटने से कुंतरी और धुर्मा गांवों में भारी तबाही मची। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार 12 लोग मलबे में दबकर लापता हैं, जबकि 2 महिलाओं और 1 बच्चे को घायल अवस्था में रेस्क्यू कर उपचार के लिए भेजा गया है। आपदा में 27 से 30 मकान और गौशालाएं क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं।

घटना की सूचना पर जिलाधिकारी चमोली संदीप तिवारी और पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार तुरंत प्रभावित गांवों में पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन से स्थिति की जानकारी ली और युद्धस्तर पर राहत कार्य संचालित करने के निर्देश दिए।

लापता लोगों की सूची

कुंतरी फाली गांव से लापता लोगों में कुंवर सिंह (42), उनकी पत्नी कांता देवी (38), पुत्र विशाल, नरेंद्र सिंह (40), जगदम्बा प्रसाद (70), उनकी पत्नी भागा देवी (65), विकास तथा देवेश्वरी देवी (65) शामिल हैं।
धुर्मा गांव से दो लोग—गुमान सिंह (75) और ममता देवी (38)—के लापता होने की पुष्टि हुई है।

रेस्क्यू अभियान जारी

एसडीआरएफ, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीमें मलबे में दबे लोगों की तलाश कर रही हैं। ड्रोन कैमरों की मदद से भी स्थिति का आकलन किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई घर पूरी तरह मलबे में दब गए हैं। कुछ लोगों से फोन पर संपर्क हुआ है, जो अभी भी अपने घरों के भीतर फंसे हैं।

स्थानीय निवासी नंदन सिंह रावत ने बताया कि “कुंतरी गांव में कई मकान पूरी तरह जमींदोज हो चुके हैं। अभी भी लोगों की कोई खबर नहीं है। हालात बेहद डरावने हैं।”

सीएम धामी के निर्देश

मुख्यमंत्री ने प्रशासन को स्पष्ट आदेश दिए हैं कि प्रभावितों को असुरक्षित स्थानों से तुरंत सुरक्षित जगहों पर ले जाया जाए और हर परिवार को राहत सामग्री, भोजन, पानी और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। घायलों के बेहतर इलाज के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। उन्होंने बिजली और पानी की आपूर्ति बहाल करने तथा क्षतिग्रस्त सड़कों को शीघ्र दुरुस्त करने के निर्देश भी जारी किए।

मुख्यमंत्री ने कहा, “आपदा की इस घड़ी में राज्य सरकार हर प्रभावित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है। राहत और बचाव दलों को तेजी से काम करने और प्रभावित गांवों में हर जरूरी सुविधा पहुंचाने के आदेश दिए गए हैं।”

प्रशासन की प्राथमिकताएं

  • लापता लोगों की खोज और सुरक्षित रेस्क्यू

  • प्रभावितों के लिए अस्थायी राहत शिविरों की स्थापना

  • भोजन, दवा और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता

  • बिजली व पानी आपूर्ति की बहाली

  • सड़क मार्गों को शीघ्र दुरुस्त कर राहत कार्यों की गति तेज करना

ग्रामीणों का कहना है कि आपदा के कारण कई परिवारों के घर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं और लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि हर प्रभावित परिवार के लिए राहत शिविरों में अस्थायी आवास, भोजन और चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है

नंदानगर क्षेत्र में बादल फटने की यह घटना एक बार फिर से उत्तराखंड की प्राकृतिक आपदा संवेदनशीलता को सामने लाती है। प्रशासन और राहत दल युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं, लेकिन लापता लोगों का जल्द से जल्द पता लगाना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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