छेनागाड़ में जेसीबी से मलबा हटाने का काम शुरू, 8 दिन बाद पहुंची जेसीबी, सोशल मीडिया दबाव के बाद तेज़ हुए हालात?

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रुद्रप्रयाग। बसुकेदार के आपदा प्रभावित छेनागाड़ क्षेत्र में आखिरकार प्रशासन ने जेसीबी और पोकलैंड मशीनों को ग्राउंड ज़ीरो पर तैनात कर दिया है। अब तक एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और डीडीआरएफ की टीमें मैन्युअल खुदाई कर रही थीं, लेकिन भारी मलबे और दलदल के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद धीमा चल रहा था। वहीं लगातार बदलते मौसम और सड़कों का अवरुद्ध होना कार्य में बाधा उत्पन्न कर रहा था। इन परिस्थितियों को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा अब ग्राउंड जीरो पर जेसीबी मशीन को तैनात किया गया है। मशीन की मदद से सर्च अभियान में गति आई है।

सड़क मार्ग बहाल करने में जुटा प्रशासन

प्रशासन ने अब प्रभावित क्षेत्र तक मशीनें पहुँचाने के लिए कई मोर्चे खोले हैं। मुख्य स्लाइड जोन जाला सहित अन्य स्थलों पर मशीनें सक्रिय जिला प्रशासन के निर्देशन में जाला के पास एक पोकलैंड व दो जेसीबी मशीनें कार्यरत हैं, वहीं कमद के पास एक पोकलैंड व दो जेसीबी मशीनें, डमारगाढ़ से किमाणा के बीच तीन जेसीबी मशीनें लगातार क्षतिग्रस्त मार्गों को सुचारु करने हेतु कार्यरत हैं। अधिकारियों का कहना है कि सड़क खुलने से अतिरिक्त मशीनरी और राहत सामग्री सीधे गाँव तक पहुँचाई जा सकेगी।

पहली प्राथमिकता सर्च एवं रेस्क्यू ऑपरेशन

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार का कहना है कि,

“छेनागाड़ क्षेत्र में लगातार खोज बचाव एवं राहत कार्य युद्ध स्तर पर जारी हैं। हमारी पहली प्राथमिकता सर्च एवं रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज करना है। जिस हेतु आज प्रभावित क्षेत्र में जेसीबी को तैनात किया गया, साथ ही सड़क मार्गों को सुचारु करने का प्रयास संबंधित विभाग द्वारा किया जा रहा है ताकि राहत सामग्री, मशीनरी और रेस्क्यू टीमें प्रभावित गाँवों तक शीघ्र पहुँच सकें। प्रशासन का पूरा प्रयास है कि जितने भी लोग इस क्षेत्र में गुमशुदा हैं उनका शीघ्र पता लगा पाए तथा अधिकतम जल्द से जल्द प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराई जाए।”

क्या सोशल मीडिया दबाव के बाद तेज़ हुए हालात

स्थानीय नेता त्रिभुवन चौहान लगातार प्रशासन की सुस्ती पर सवाल उठा रहे थे। चौहान ने सोशल मीडिया पर यह मुद्दा जोरशोर से उठाया और यहां तक कहा कि अगर सरकार 8 सितंबर तक मलबा हटाने की कार्रवाई तेज़ नहीं करती, तो वे स्थानीय जनता के साथ गैंती-फावड़ा लेकर खुदाई शुरू करेंगे। उनके इस आह्वान को क्षेत्रीय जनता का व्यापक समर्थन भी मिल रहा था। माना जा रहा है कि यही दबाव प्रशासन को जेसीबी मशीनें तैनात करने के लिए मजबूर कर गया।

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