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केदारनाथ: एक पवित्र तीर्थ स्थल। kedar times, kedar, kedarnath

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Kedarnath Nagar: केदारनाथ (Kedarnath) भारत के उत्तराखण्ड राज्य के गढ़वाल मण्डल के रुद्रप्रयाग ज़िले में स्थित एक नगर है। यह ज़िले के मुख्यालय, रुद्रप्रयाग से 86 किमी दूर है। यह केदारनाथ धाम के कारण प्रसिद्ध है, जो हिन्दू धर्म के अनुयाइयों के लिए पवित्र स्थान है। यहाँ स्थित केदारनाथ मंदिर का शिवलिंग बारह ज्योतिर्लिंग में से एक है, और हिन्दू धर्म के चारधाम और पंच केदार में गिना जाता है।

केदारनाथ मंदिर का विवरण

केदारनाथ का मंदिर 3593 मीटर की ऊँचाई पर बना हुआ एक भव्य एवं विशाल मंदिर है। इतनी ऊँचाई पर इस मंदिर का निर्माण कैसे हुआ, इस बारे में आज भी पूर्ण सत्य ज्ञात नहीं हैं। सतयुग में शासन करने वाले राजा केदार के नाम पर इस स्थान का नाम केदार पड़ा। राजा केदार ने सात महाद्वीपों पर शासन किया और वे एक बहुत पुण्यात्मा राजा थे। उनकी एक पुत्री वृंदा थी, जो देवी लक्ष्मी की एक आंशिक अवतार मानी जाती है और उन्होंने 6०,००० वर्षों तक तपस्या की थी। वृंदा के नाम पर ही इस स्थान को वृंदावन भी कहा जाता है।

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यहाँ तक पहुँचने के मार्ग

केदारनाथ तक पहुँचने के दो मुख्य मार्ग हैं। पहला 14 किमी लंबा पक्का पैदल मार्ग है जो गौरीकुण्ड से आरंभ होता है। गौरीकुण्ड उत्तराखंड के प्रमुख स्थानों जैसे ऋषिकेश, हरिद्वार, देहरादून इत्यादि से जुड़ा हुआ है। दूसरा मार्ग हवाई मार्ग है। हाल ही में राज्य सरकार द्वारा अगस्त्यमुनि और फ़ाटा से केदारनाथ के लिये पवन हंस नामक हेलीकाप्टर सेवा आरंभ की गई है, जिसका किराया उचित है। सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण मंदिर बंद कर दिया जाता है और केदारनाथ में कोई नहीं रुकता। नवंबर से अप्रैल तक भगवान केदारनाथ की पालकी गुप्तकाशी के निकट उखिमठ नामक स्थान पर स्थानांतरित कर दी जाती है।

भ्रमण

केदारनाथ मंदिर एक प्राचीन और प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थ स्थल है। कहा जाता है कि भारत की चार दिशाओं में चार धाम स्थापित करने के बाद जगतगुरु शंकराचार्य ने 32 वर्ष की आयु में यहीं श्री केदारनाथ धाम में समाधि ली थी। उन्हीं ने वर्तमान मंदिर बनवाया था। मंदिर के पास स्थित एक झील में बर्फ तैरती रहती है, और ऐसा माना जाता है कि इसी झील से युधिष्ठिर स्वर्ग गये थे। श्री केदारनाथ धाम से छह किलोमीटर की दूरी पर चौखम्बा पर्वत पर वासुकी ताल है, जहां ब्रह्म कमल खिलते हैं। यहाँ के अन्य दर्शनीय स्थल हैं गौरी कुण्ड, सोन प्रयाग, त्रिजुगीनारायण, गुप्तकाशी, उखीमठ, अगस्त्यमुनि, और पंच केदार।

आवागमन

केदारनाथ पहुँचने के लिए कोटद्वार और ऋषिकेश तक रेल द्वारा पहुँचा जा सकता है। सड़क मार्ग द्वारा गौरीकुण्ड तक जाया जा सकता है, जो केदारनाथ मंदिर से 14 किलोमीटर पहले है। यहां से पैदल मार्ग, खच्चर या पालकी द्वारा केदारनाथ पहुँचा जा सकता है। नजदीक हवाई अड्डा जौली ग्रांट 246 किलोमीटर दूरी पर स्थित है, जहाँ से केदारनाथ के लिए हवाई सेवा हाल ही में शुरू हुई है।

इतिहास

केदारनाथ का इतिहास हिंदू पौराणिक कथाओं और किंवदंतियों से गहराई से जुड़ा हुआ है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, केदारनाथ बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जिन्हें भगवान शिव का सबसे पवित्र निवास माना जाता है। कहा जाता है कि कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद, पांडवों ने अपने पापों के लिए भगवान शिव से क्षमा मांगी। शिव ने एक बैल का रूप धारण किया और हिमालय के गढ़वाल क्षेत्र में छिप गए। पांडवों ने शिव का पीछा किया और अंततः उन्हें केदारनाथ में पाया। भगवान शिव ने उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें क्षमा कर दिया और पांच अलग–अलग स्थानों पर अपने दिव्य रूप में प्रकट हुए, जिन्हें पंच केदार के रूप में जाना जाता है।

वर्तमान केदारनाथ मंदिर का निर्माण 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य द्वारा किया गया था, जो एक महान भारतीय दार्शनिक और धर्मशास्त्री थे। मंदिर की वास्तुकला हिंदू और तिब्बती शैलियों का मिश्रण दर्शाती है।

केदारनाथ अपने धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के साथ-साथ अपनी अद्वितीय भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की यात्रा एक अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है और भक्तों को भगवान शिव के आशीर्वाद से समृद्ध करती है। केदारनाथ मंदिर और इसके आसपास के दर्शनीय स्थल यहाँ के आगंतुकों को एक अद्भुत अनुभव प्रदान करते हैं।

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