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लिलियम की खुशबू से महका चम्पावत: स्वरोजगार, नवाचार और आत्मनिर्भरता की जगी उम्मीद

लिलियम की खुशबू से महका चम्पावत

चम्पावत, जून 2025: हॉलैंड के बाद अब उत्तराखंड का चम्पावत जिला लिलियम की खुशबू से महक उठा है। लोहाघाट विकासखंड के धारित्री एग्रो प्राइवेट लिमिटेड फार्म में व्यावसायिक स्तर पर की जा रही लिलियम फूलों की खेती ना केवल जिले को देशभर में पहचान दिला रही है, बल्कि युवाओं के लिए स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की राह भी खोल रही है।

इस फार्म से हर साल लगभग 15,000 लिलियम बंचेस का उत्पादन हो रहा है, जिससे 1 करोड़ रुपये से अधिक की सालाना आय अर्जित की जा रही है। देश के बड़े शहरों—दिल्ली, मुंबई आदि में इस फूल की भारी मांग है, जिसका उपयोग शादी, सजावट और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में खूब हो रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा परिकल्पित आदर्श जनपद चम्पावत की दिशा में यह फार्म एक मिसाल बन गया है। पॉलीहाउस तकनीक के जरिये यहां मल्टी-लेयर क्रॉपिंग भी हो रही है, जिसमें लिलियम के साथ-साथ सेब और मौसमी सब्जियां भी उगाई जा रही हैं।

इस पहल से 14–15 स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है और पलायन की दर में कमी आई है।

लिलियम फार्म न केवल खेती के क्षेत्र में नवाचार का उदाहरण है, बल्कि यह दर्शाता है कि किस प्रकार स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग कर आत्मनिर्भरता और ग्रामीण विकास संभव है।

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