Annaprashan Muhurat 2026: बचपन का हर पल अपने आप में खास होता है, लेकिन जब कोई बच्चा पहली बार ठोस आहार ग्रहण करता है, तो वह पल जीवनभर यादगार बन जाता है। भारतीय संस्कृति में इस अवसर को ‘अन्नप्राशन संस्कार’ कहा जाता है — जो बच्चे के जीवन का छठा संस्कार माना गया है। यह सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक भावनात्मक और सांस्कृतिक परंपरा भी है, जो परिवार को एक साथ जोड़ती है।
अन्नप्राशन मुहूर्त 2026 (Annaprashan Muhurat 2026)
अन्नप्राशन संस्कार 2026 न केवल एक धार्मिक परंपरा है, बल्कि यह बच्चे के जीवन का पहला महत्वपूर्ण कदम भी है — जहाँ दूध के आहार से ठोस भोजन की ओर यात्रा शुरू होती है। यह संस्कार बच्चे के स्वास्थ्य, पोषण और समृद्धि की कामना का प्रतीक है।
जनवरी अन्नप्राशन मुहूर्त 2026 (January Annaprashan Muhurat 2026)
1 जनवरी 2026, गुरुवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:45 से 10:23 तक, 11:51 से 04:47 तक, 07:01 से 10:52 तक, नक्षत्र: रोहिणी।
5 जनवरी 2026, सोमवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 08:25 से दोपहर 01:00 तक, नक्षत्र: पुष्य।
9 जनवरी 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: रात 08:50 से 11:07 तक, नक्षत्र: हस्त।
12 जनवरी 2026, सोमवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: दोपहर 02:08 से शाम 06:18 तक, रात 08:38 से 10:56 तक, नक्षत्र: स्वाती।
21 जनवरी 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:45 से 10:32 तक, 11:57 से 05:43 तक, 08:03 से 10:20 तक, नक्षत्र: धनिष्ठा, शतभिषा।
23 जनवरी 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: दोपहर 03:20 से शाम 07:55 तक, नक्षत्र: पूर्व भाद्रपदा।
28 जनवरी 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 10:05 से दोपहर 03:00 तक, नक्षत्र: रोहिणी।
अन्नप्राशन मुहूर्त फरवरी 2026 (February Annaprashan Muhurat 2026)
6 फरवरी 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:37 से 08:02 तक, 09:29 से 02:25 तक, शाम 04:40 से रात 11:34 तक, नक्षत्र: हस्त।
18 फरवरी 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: शाम 06:13 से रात 10:46 तक, नक्षत्र: शतभिषा।
20 फरवरी 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:26 से 09:59 तक, 11:34 से 03:45 तक, नक्षत्र: उत्तर भाद्रपदा।
अन्नप्राशन मुहूर्त मार्च 2026 (March Annaprashan Muhurat 2026)
4 मार्च 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: शाम 07:35 से रात 09:51 तक, नक्षत्र: उत्तर फाल्गुनी।
5 मार्च 2026, गुरुवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:43 से दोपहर 12:39 तक, 02:54 से रात 09:47 तक, नक्षत्र: उत्तर फाल्गुनी, हस्त।
16 मार्च 2026, सोमवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: दोपहर 02:10 से रात 10:07 तक, नक्षत्र: धनिष्ठा।
20 मार्च 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 06:56 से 08:09 तक, 09:44 से 04:15 तक, शाम 06:32 से रात 10:44 तक, नक्षत्र: रेवती।
25 मार्च 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:49 से दोपहर 01:35 तक, नक्षत्र: मृगशिरा।
27 मार्च 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 11:12 से दोपहर 03:47 तक, शाम 06:05 से रात 10:39 तक, नक्षत्र: पुनर्वसु, पुष्य।
अन्नप्राशन मुहूर्त अप्रैल 2026 (April Annaprashan Muhurat 2026)
2 अप्रैल 2026, गुरुवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:18 से 08:53 तक, नक्षत्र: हस्त।
3 अप्रैल 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 10:45 से दोपहर 01:00 तक, 03:20 से रात 10:13 तक, नक्षत्र: चित्रा।
6 अप्रैल 2026, सोमवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: शाम 05:25 से रात 10:26 तक, नक्षत्र: अनुराधा।
15 अप्रैल 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: शाम 04:50 से रात 11:01 तक, नक्षत्र: पूर्व भाद्रपदा।
20 अप्रैल 2026, सोमवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:42 से 09:38 तक, नक्षत्र: रोहिणी।
23 अप्रैल 2026, गुरुवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:31 से 11:41 तक, 02:01 से रात 11:13 तक, नक्षत्र: पुनर्वसु।
29 अप्रैल 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:07 से 09:03 तक, 11:17 से शाम 06:11 तक, नक्षत्र: हस्त।
अन्नप्राशन मुहूर्त मई 2026 (May Annaprashan Muhurat 2026)
1 मई 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: दोपहर 01:30 से रात 08:23 तक, नक्षत्र: स्वाती।
4 मई 2026, सोमवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 06:47 से 10:58 तक, नक्षत्र: अनुराधा।
11 मई 2026, सोमवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: शाम 05:24 से 07:44 तक, रात 10:02 से 12:02 तक, नक्षत्र: शतभिषा।
14 मई 2026, गुरुवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: दोपहर 02:56 से रात 09:50 तक, नक्षत्र: रेवती।
15 मई 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 08:00 से 10:14 तक, नक्षत्र: अश्विनी।
अन्नप्राशन मुहूर्त जून 2026 (June Annaprashan Muhurat 2026)
17 जून 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 05:54 से 08:05 तक, दोपहर 12:42 से शाम 07:37 तक, रात 09:41 से 10:08 तक, नक्षत्र: पुनर्वसु, पुष्य।
24 जून 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 09:57 से शाम 04:51 तक, नक्षत्र: चित्रा।
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अन्नप्राशन मुहूर्त जुलाई 2026 (July Annaprashan Muhurat 2026)
1 जुलाई 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 09:30 से 11:47 तक, शाम 04:23 से रात 10:28 तक, नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा।
2 जुलाई 2026, गुरुवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:06 से दोपहर 02:00 तक, शाम 04:19 से रात 10:24 तक, नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा, श्रवण।
9 जुलाई 2026, गुरुवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: दोपहर 01:32 से 03:52 तक, नक्षत्र: अश्विनी।
15 जुलाई 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: दोपहर 01:09 से शाम 05:47 तक, रात 07:51 से 10:16 तक, नक्षत्र: पुष्य।
20 जुलाई 2026, सोमवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 06:07 से दोपहर 12:49 तक, 03:08 से रात 09:13 तक, नक्षत्र: हस्त।
24 जुलाई 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 06:09 से 08:00 तक, नक्षत्र: अनुराधा।
29 जुलाई 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:44 से दोपहर 12:13 तक, 02:33 से रात 08:38 तक, नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा।
30 जुलाई 2026, गुरुवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: रात 10:01 से 11:26 तक, नक्षत्र: धनिष्ठा।
31 जुलाई 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:32 से दोपहर 02:25 तक, शाम 04:44 से रात 09:57 तक, नक्षत्र: धनिष्ठा।
अन्नप्राशन मुहूर्त अगस्त 2026 (August Annaprashan Muhurat 2026)
3 अगस्त 2026, सोमवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 09:37 से शाम 04:32 तक, 06:36 से रात 10:30 तक, नक्षत्र: उत्तर भाद्रपदा।
5 अगस्त 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 11:46 से शाम 06:28 तक, 08:10 से 09:38 तक, नक्षत्र: अश्विनी।
7 अगस्त 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: रात 09:30 से 10:55 तक, नक्षत्र: रोहिणी।
10 अगस्त 2026, सोमवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: दोपहर 04:04 से रात 09:18 तक, नक्षत्र: पुनर्वसु।
17 अगस्त 2026, सोमवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 06:25 से 10:59 तक, 01:18 से 05:41 तक, नक्षत्र: चित्रा।
26 अगस्त 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 06:27 से 10:23 तक, नक्षत्र: श्रवण।
28 अगस्त 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 06:28 से दोपहर 12:35 तक, नक्षत्र: शतभिषा।
अन्नप्राशन मुहूर्त सितंबर 2026 (September Annaprashan Muhurat 2026)
17 सितंबर 2026, गुरुवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: दोपहर 03:39 से शाम 08:14 तक, नक्षत्र: अनुराधा।
21 सितंबर 2026, सोमवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 08:41 से शाम 05:05 तक, 06:33 से 09:33 तक, नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा।
24 सितंबर 2026, गुरुवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 06:41 से 10:49 तक, 01:07 से 06:21 तक, 07:46 से रात 11:17 तक, नक्षत्र: धनिष्ठा, शतभिषा।
अन्नप्राशन मुहूर्त अक्टूबर 2026 (October Annaprashan Muhurat 2026)
12 अक्टूबर 2026, सोमवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:19 से 09:38 तक, 11:57 से शाम 05:10 तक, 06:35 से रात 10:06 तक, नक्षत्र: स्वाती।
21 अक्टूबर 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:30 से 09:03 तक, 11:21 से दोपहर 03:07 तक, नक्षत्र: धनिष्ठा।
26 अक्टूबर 2026, सोमवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:00 से 11:02 तक, नक्षत्र: अश्विनी।
30 अक्टूबर 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:03 से 08:27 तक, नक्षत्र: मृगशिरा।
अन्नप्राशन मुहूर्त नवंबर 2026 (November Annaprashan Muhurat 2026)
6 नवंबर 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: दोपहर 12:22 से 02:05 तक, 03:32 से रात 08:28 तक, नक्षत्र: हस्त।
11 नवंबर 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:40 से 09:59 तक, 12:03 से 01:45 तक, नक्षत्र: अनुराधा, ज्येष्ठा।
16 नवंबर 2026, सोमवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:20 से दोपहर 01:25 तक, 02:53 से शाम 07:48 तक, रात 10:03 से 12:20 तक, नक्षत्र: श्रवण।
20 नवंबर 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:26 से 09:23 तक, नक्षत्र: उत्तर भाद्रपदा।
25 नवंबर 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: रात 09:28 से 11:48 तक, नक्षत्र: मृगशिरा।
26 नवंबर 2026, गुरुवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 09:00 से दोपहर 02:13 तक, 03:38 से 07:09 तक, नक्षत्र: मृगशिरा।
अन्नप्राशन मुहूर्त दिसंबर 2026 (December Annaprashan Muhurat 2026)
3 दिसंबर 2026, गुरुवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:29 से दोपहर 12:18 तक, नक्षत्र: उत्तर फाल्गुनी।
14 दिसंबर 2026, सोमवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:37 से 11:35 तक, 01:03 से शाम 05:58 तक, नक्षत्र: श्रवण, धनिष्ठा।
16 दिसंबर 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:41 से दोपहर 12:55 तक, 02:20 से 03:55 तक, नक्षत्र: शतभिषा।
23 दिसंबर 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: रात 09:58 से 12:11 तक, नक्षत्र: मृगशिरा।
25 दिसंबर 2026, शुक्रवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:43 से दोपहर 12:19 तक, 01:44 से रात 09:50 तक, नक्षत्र: पुनर्वसु।
30 दिसंबर 2026, बुधवार, अन्नप्राशन मुहूर्त: सुबह 07:44 से 10:32 तक, 12:00 से 01:25 तक, नक्षत्र: उत्तर फाल्गुनी।
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अन्नप्राशन संस्कार क्या है? (What Is Annaprashan Sanskar?)
‘अन्नप्राशन’ शब्द संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है – ‘अन्न’ (अर्थात भोजन) और ‘प्राशन’ (अर्थात ग्रहण करना)। यह संस्कार बच्चे को पहली बार ठोस आहार खिलाने की परंपरा है। हिंदू धर्म में इसे ‘षोडश संस्कारों’ (16 प्रमुख संस्कारों) में से एक माना गया है।
सामान्यतः यह संस्कार बच्चे के छह महीने पूरे होने पर किया जाता है, लेकिन कभी-कभी बालक के लिए छठे या सातवें महीने में और बालिका के लिए पाँचवें या छठे महीने में भी किया जाता है। इस संस्कार का उद्देश्य केवल भोजन की शुरुआत नहीं, बल्कि बच्चे के शारीरिक विकास, मानसिक शक्ति, और स्वास्थ्य के लिए शुभकामनाएँ देना भी है।
अन्नप्राशन संस्कार का महत्व (Importance of Annaprashan Sanskar)
अन्नप्राशन केवल एक रस्म नहीं, बल्कि यह बच्चे के विकास का प्रतीक है। जब बच्चा दूध के अलावा पहला ठोस भोजन ग्रहण करता है, तब उसे जीवन के नए चरण में प्रवेश माना जाता है।
यह संस्कार बच्चे को ‘अन्न’ (भोजन) के प्रति सम्मान सिखाने का प्रतीक है।
इससे बच्चे के शरीर में शक्ति, पोषण और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की प्रार्थना की जाती है।
यह माता-पिता के लिए कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर होता है, जिन्होंने ईश्वर से यह जीवनदायिनी संतान पाई है।
अन्नप्राशन संस्कार परिवार, रिश्तेदारों और समाज के बीच प्रेम और एकता का भाव बढ़ाता है।
अन्नप्राशन संस्कार कब किया जाता है? (When Is Annaprashan Ceremony Performed?)
अन्नप्राशन का सही समय बच्चे की उम्र और पंचांग के अनुसार तय किया जाता है। प्रायः यह संस्कार तब किया जाता है जब बच्चे के दाँत निकलने लगते हैं और वह ठोस भोजन को पचा सकता है।
शुभ महीनों में किए जाने वाले संस्कार:
बालक के लिए: छठा या आठवाँ महीना शुभ माना जाता है।
बालिका के लिए: पाँचवाँ या सातवाँ महीना श्रेष्ठ होता है।
शुभ तिथियाँ और नक्षत्र:
पंडित पंचांग देखकर पुष्य, रोहिणी, मृगशिरा, स्वाति, अनुराधा, हस्त, अभिजीत और श्रवण नक्षत्रों में इस संस्कार को करने की सलाह देते हैं। रविवार, सोमवार, बुधवार और गुरुवार इस विधि के लिए शुभ माने जाते हैं।
अन्नप्राशन संस्कार की विधि (Annaprashan Ceremony Rituals)
अन्नप्राशन संस्कार को सही विधि से संपन्न करने के लिए कुछ धार्मिक प्रक्रियाएँ अपनाई जाती हैं। नीचे इस पूरे कार्यक्रम की पारंपरिक विधि दी गई है:
पूजन स्थल की तैयारी:
सबसे पहले पूजा के लिए एक स्वच्छ स्थान तैयार करें। फूलों, दीयों, अगरबत्ती और सुगंधित वस्तुओं से उसे सजाएँ।शिशु को स्नान कराएँ और नए वस्त्र पहनाएँ:
बच्चे को नहलाकर पवित्र कपड़े पहनाएँ। शुभता के लिए लाल या पीले रंग के वस्त्र सबसे अच्छे माने जाते हैं।पंचामृत स्नान:
शिशु को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल) से स्नान कराएँ। यह शुद्धिकरण का प्रतीक होता है।पूजन और मंत्रोच्चार:
पंडित देवताओं का आवाहन करते हैं, विशेषकर अन्नदेवता और भगवान विष्णु का, क्योंकि भगवान विष्णु को ‘अन्न का रक्षक’ माना गया है।पहला भोजन ग्रहण कराना:
पंडित या परिवार का सबसे वरिष्ठ सदस्य (अक्सर दादा-दादी) बच्चे को थोड़ी मात्रा में खीर या चावल खिलाते हैं। यह पल पूरे परिवार के लिए अत्यंत शुभ और भावनात्मक होता है।जल ग्रहण कराना:
भोजन के बाद शिशु को थोड़ी मात्रा में जल पिलाया जाता है, जो संस्कार की पूर्णता का प्रतीक होता है।आशीर्वाद और प्रसाद वितरण:
परिवार के सभी सदस्य बच्चे को आशीर्वाद देते हैं, और प्रसाद सभी में बांटा जाता है।
अन्नप्राशन संस्कार में क्या खिलाया जाता है? (What Food Is Given During Annaprashan?)
अन्नप्राशन के दौरान बच्चे को बहुत हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन दिया जाता है। पारंपरिक रूप से इसे शुद्ध घी और चावल से बनी खीर (या पायसम) के रूप में तैयार किया जाता है।
कुछ स्थानों पर इसमें गुड़, दूध और घी मिलाया जाता है, जिससे यह स्वादिष्ट और पौष्टिक बनता है।
दक्षिण भारत में इसे “चोरू” या “चोरुनु” कहा जाता है, जहाँ इसे केले या चावल के पेस्ट के रूप में खिलाया जाता है।
अन्नप्राशन संस्कार के दौरान पालन करने योग्य सावधानियाँ (Precautions to Follow During Annaprashan)
भोजन ताज़ा और साफ-सुथरा होना चाहिए।
बच्चे को बहुत ज्यादा भोजन न दें — बस एक चम्मच ही पर्याप्त है।
केवल वही सामग्री उपयोग करें, जो बच्चे की उम्र के अनुसार सुरक्षित और पचने योग्य हो।
पूजा स्थल को पहले से स्वच्छ और शांत वातावरण में तैयार करें।
बच्चे को कोई एलर्जी या असुविधा हो, तो डॉक्टर की सलाह लें।
अन्नप्राशन समारोह को खास कैसे बनाएं? (How to Make Annaprashan Ceremony Special?)
आजकल कई परिवार इस रस्म को आधुनिक अंदाज़ में भी मनाते हैं, जिसमें पारंपरिकता के साथ क्रिएटिविटी का मेल होता है। यहाँ कुछ सुझाव हैं:
थीम डेकोरेशन करें: बच्चे के लिए प्यारा सा थीम चुनें — जैसे “लिटिल कृष्णा”, “बेबी प्रिंस” या “लिटिल देवी”।
हल्के रंगों, फूलों और गुब्बारों से स्थल सजाएँ।कस्टमाइज्ड इनविटेशन कार्ड: डिजिटल या पारंपरिक निमंत्रण पत्र तैयार करें जिसमें संस्कार का अर्थ और कार्यक्रम का समय स्पष्ट रूप से लिखा हो।
फोटोशूट का प्रबंध करें: इस दिन के हर खास पल को यादगार बनाने के लिए प्रोफेशनल फोटोग्राफर रखें।
सांस्कृतिक कार्यक्रम: परिवार के सदस्य भजन या संस्कृत श्लोकों का गायन कर सकते हैं, जिससे माहौल और भी पवित्र बनता है।
अन्नप्राशन संस्कार का वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Importance of Annaprashan)
अन्नप्राशन संस्कार केवल धार्मिक मान्यता पर आधारित नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी है।
छह महीने की उम्र में बच्चे की पाचन शक्ति विकसित होने लगती है, जिससे वह ठोस भोजन को स्वीकार कर सकता है।
ठोस आहार से बच्चे को आवश्यक पोषक तत्व जैसे आयरन, प्रोटीन और विटामिन मिलते हैं।
यह बच्चे की खाद्य आदतों की शुरुआत का भी संकेत है।
अन्नप्राशन संस्कार में परिवार की भूमिका (Role of Family in Annaprashan)
इस संस्कार की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि इसमें पूरा परिवार एक साथ आता है। माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी, और रिश्तेदार बच्चे को आशीर्वाद देते हैं।
माता-पिता के लिए यह पल बेहद भावनात्मक होता है क्योंकि यह उनके बच्चे के जीवन के पहले पड़ाव का उत्सव है।
निष्कर्ष (Conclusion)
अन्नप्राशन संस्कार न केवल एक धार्मिक परंपरा है, बल्कि यह बच्चे के जीवन का पहला महत्वपूर्ण संस्कार भी है। इस दिन परिवार बच्चे के अच्छे स्वास्थ्य, उज्ज्वल भविष्य और सुख-समृद्धि की कामना करता है। यह संस्कार बच्चे को अन्न ग्रहण कराने की पवित्र शुरुआत मानी जाती है।
अन्नप्राशन पूजा पूरे विधि-विधान से करने से बच्चे के जीवन में शुभ फल और दीर्घायु प्राप्त होती है।
अगर आप अपने बच्चे के अन्नप्राशन संस्कार के लिए सही मुहूर्त जानना चाहते हैं, तो किसी अनुभवी ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें।
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