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अमित शाह की टिप्पणी पर कांग्रेस का विरोध: संसद सत्र के बाद भी जारी रहेगा आंबेडकर मुद्दा

अमित शाह की टिप्पणी पर कांग्रेस का विरोध: संसद सत्र के बाद भी जारी रहेगा आंबेडकर मुद्दा

नई दिल्ली, 18 दिसंबर 2024: कांग्रेस ने संसद सत्र के दौरान और इसके बाद भी डॉ. भीमराव आंबेडकर से जुड़े मुद्दे को लेकर सत्तापक्ष के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने का ऐलान किया है। पार्टी इसे भाजपा पर हमला बोलने और हाशिए पर पड़े समुदायों के साथ जुड़ाव का अवसर मान रही है।

संसद से सड़कों तक विरोध

कांग्रेस ने 17 दिसंबर को संसद भवन के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू किया। इसके बाद पार्टी ने अपनी राज्य इकाइयों को निर्देश दिया कि वे इस मुद्दे को 18 दिसंबर को राज्य स्तर पर उठाएं। राजस्थान, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए।

कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य कमलेश्वर पटेल ने कहा, “डॉ. आंबेडकर के प्रति दिखाया गया अनादर एक गंभीर मुद्दा है। कांग्रेस इसे जनता तक ले जाएगी और भाजपा को इसका जवाब देना होगा।”

राजनीतिक रणनीति और सहयोगियों का समर्थन

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस ने गृह मंत्री की टिप्पणी को सत्तापक्ष के खिलाफ हथियार के रूप में भुनाने की योजना बनाई है। इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और अन्य सहयोगी दल भी कांग्रेस के साथ खड़े हैं।

संसद के भीतर, कांग्रेस सदस्यों ने आंबेडकर के समर्थन में नीले कपड़े पहने, जबकि सपा सदस्यों ने लाल टोपी पहनकर विरोध दर्ज किया।

युवाओं और विधायकों का प्रदर्शन

युवा कांग्रेस के सदस्यों ने दिल्ली में अपनी शर्ट उतारकर विरोध प्रदर्शन किया। वहीं, महाराष्ट्र और कर्नाटक में कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा के अंदर और बाहर विरोध प्रदर्शन किया।

संविधान और आंबेडकर का सम्मान

पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने कहा, “डॉ. आंबेडकर द्वारा लिखा गया संविधान देश के लिए एक पवित्र ग्रंथ है। उनका अपमान पूरे दलित समुदाय का अपमान है।”

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि पार्टी संविधान और समाज के वंचित वर्गों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

आगे की योजना

कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि 20 दिसंबर को संसद का शीतकालीन सत्र समाप्त होने के बाद भी यह मुद्दा उठाया जाएगा। पार्टी ने सत्तापक्ष पर आंबेडकर का अपमान करने और दलित समुदाय की भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया है।

कांग्रेस ने इस मुद्दे को आगामी चुनावों के मद्देनजर भाजपा को घेरने के लिए एक प्रभावी रणनीति के रूप में अपनाया है। यह दलित और वंचित समुदायों के समर्थन को बढ़ाने का प्रयास है, जो कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।

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