Uttarakhand

मैती आंदोलन: पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल, जानें इसका इतिहास

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Maiti Movement: मैती आंदोलन एक विशेष पर्यावरणीय पहल है, जिसे श्री कल्याण सिंह रावत ने शुरू किया था। उत्तराखंड में ‘मैती’ शब्द का अर्थ मायके वाले होता है। इस आंदोलन में, बेटी की शादी के समय मायके वाले फेरे के बाद वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच एक पेड़ लगाते हैं और उसे अपना मैती बनाते हैं। इस पेड़ की देखभाल मायके वाले करते हैं, यह मानते हुए कि जिस प्रकार पेड़ फलता-फूलता रहेगा, उसी प्रकार बेटी का पारिवारिक जीवन भी समृद्ध होगा। इस भावना से प्रेरित होकर मायके वाले उस पेड़ का ख्याल अपनी बेटी की तरह ही रखते हैं।

मैती आंदोलन की शुरुआत ( History Of Maiti Movement)

साल 1994 में, चमोली के ग्वालदम इंटर कॉलेज में जीव विज्ञान के प्रवक्ता श्री कल्याण सिंह रावत ने इस पर्यावरणीय आंदोलन की शुरुआत की। उन्होंने पहले विद्यालय स्तर पर इस पहल को प्रारंभ किया, फिर गांव और पूरे प्रदेश को इस आंदोलन ने प्रकृति के प्रति प्रेरित किया। धीरे-धीरे यह आंदोलन इतना बड़ा हो गया कि अब भारत के 18,000 से अधिक गांव और 18 राज्य इस आंदोलन से जुड़ चुके हैं।

मैती आंदोलन की प्रेरणा

कल्याण सिंह रावत को पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा चिपको आंदोलन की सफलता से मिली। 1982 में, शादी के दूसरे दिन उनकी पत्नी मंजू रावत द्वारा दो पपीते के पेड़ लगाए जाने के बाद उनके मन में ‘मैती’ का विचार आया, लेकिन उस समय इसे अमल में नहीं ला पाए। 1987 में उत्तरकाशी में भयंकर सूखा पड़ा, तब उन्होंने वृक्ष अभिषेक समारोह मेला का आयोजन किया, जिसमें ग्राम स्तर पर वृक्ष अभिषेक समिति का गठन किया गया और ग्राम प्रधान को इसका अध्यक्ष बनाया गया। उनकी इस पहल की सराहना हर किसी ने की।

1994 में ग्वालदम राजकीय इंटर कॉलेज में जीव विज्ञान प्रवक्ता के पद पर रहते हुए, कल्याण सिंह ने स्कूली बच्चों को मैती आंदोलन के लिए प्रेरित किया। फिर धीरे-धीरे पूरे गांव के लोगों को भी प्रेरित करने का कार्य किया।

अन्य देशों में मैती आंदोलन की शुरुआत

मैती आंदोलन 1994 से अब तक लगातार उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में चल रहा है। कल्याण सिंह रावत जी के मैती आंदोलन के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ‘मन की बात’ में उनकी प्रशंसा कर चुके हैं। साल 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उन्हें 26 जनवरी को पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा गया है। नितिन गडकरी ने विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस पर उन्हें सम्मानित किया है। उन्हें बेस्ट इकोलॉजिस्ट सहित कई अन्य पुरस्कार भी मिल चुके हैं। कनाडा की पूर्व विदेश मंत्री फ्लोरा डोनाल्ड ने भी कल्याण सिंह रावत के इस बेहतरीन कार्य की तारीफ की है। अब “मैती आंदोलन” की शुरुआत यूएस, नेपाल, यूके, कनाडा और इंडोनेशिया में भी हुई है, जिसे हिमाचल प्रदेश ने भी अपनाया है।

मैती आंदोलन न केवल पर्यावरण संरक्षण का एक महत्वपूर्ण प्रयास है, बल्कि यह सामाजिक और पारिवारिक संबंधों को भी मजबूत करता है। यह आंदोलन न केवल भारत में, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने में सफल रहा है। कल्याण सिंह रावत का यह प्रयास हमारे समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बना रहेगा।

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