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कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत के कैंप कार्यालय में समाधान की उम्मीद, झूठ से बचें और साक्ष्य साथ लाएं

कुमाऊं आयुक्त के कैंप कार्यालय में समाधान की उम्मीद, झूठ से बचें और साक्ष्य साथ लाएं

हल्द्वानी: कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत अपनी जनसुनवाई की कार्यशैली के लिए खासे प्रसिद्ध हैं। हर तरफ से निराश और परेशान लोग अक्सर उनके कैंप कार्यालय पहुंचते हैं। हालांकि, न्याय की उम्मीद लिए आने वालों को कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

ईमानदारी और साक्ष्य हैं सफलता की कुंजी

आयुक्त दीपक रावत को झूठ बिलकुल पसंद नहीं। अगर फरियादी झूठ बोलते हैं और उनका झूठ पकड़ा जाता है, तो न्याय मिलना मुश्किल हो सकता है। इसके साथ ही, साक्ष्य लाना भी आवश्यक है। चाहे जमीन विवाद हो या अन्य धोखाधड़ी, संबंधित डिजिटल या हार्ड कॉपी प्रमाण जैसे फोटो, वीडियो, या दस्तावेज साथ लाएं।

समस्या और समाधान के उदाहरण

  1. जमीन का फर्जीवाड़ा: रामगढ़ के बसगांव में हुए एक जमीन विवाद में दोनों पक्षों को बुलाया गया। दूसरे पक्ष के अनुपस्थित रहने पर आयुक्त ने पुलिस को उन्हें अगली सुनवाई में पेश करने के निर्देश दिए।
  2. किराया विवाद: हल्द्वानी निवासी गणेश सिंह जीना ने किराएदार से जुड़ी शिकायत दर्ज कराई। आयुक्त ने मामले में दोनों पक्षों को तलब किया।
  3. भूमि पर अवैध कब्जा: धारी के 24 परिवारों ने अपनी भूमि पर जबरन कब्जे की शिकायत की। आयुक्त ने तत्काल एसडीएम को अवैध कब्जा रोकने के निर्देश दिए।
  4. वेतन भुगतान: हल्द्वानी निवासी रेखा बोहरा ने पिछले जनसुनवाई में अपने चार माह के बकाया वेतन की शिकायत की थी। इसके बाद, पार्लर की मालिक ने आंशिक भुगतान किया। शेष राशि के लिए भी आयुक्त ने आदेश जारी किया।

आयुक्त कार्यालय की प्राथमिकताएं

  • बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं, और दिव्यांगों के मामलों को प्राथमिकता दी जाती है।
  • दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले लोगों के लिए भी विशेष ध्यान रखा जाता है।

जरूरी सुझाव

  1. झूठ से बचें: सच्चाई और ईमानदारी ही आपको न्याय दिला सकती है।
  2. साक्ष्य लाएं: अपनी शिकायत से जुड़े सभी प्रमाण साथ लाना अनिवार्य है।
  3. निचले स्तर पर प्रयास करें: सीधे आयुक्त कार्यालय न आकर पहले अन्य स्तरों पर समाधान का प्रयास करें।

कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत ने जनसुनवाई में आज भी कई मामलों में न्याय दिलाया और उम्मीद जगाई। साथ ही, धोखाधड़ी के मामलों में कड़ी फटकार लगाते हुए उन्हें कानून के दायरे में लाने का भरोसा दिलाया।

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